चौगामा भोज (मैथिली लघु कथा)

चौगामा भोज 
                       (लघु कथा)

बंशी बाबुक मृत्यु भ’ गेलनि। बड्ड नामी लोक। जीवन काल मे झंडा फहराइन। सुखितगर परिवार। सब तरहें भरल पूरल! चौगामा भोज हेतै। कच्ची -पक्की दुनू। पक्की मे बिचार भेलै जे पूरी, डालना, कटहर आलू के तरकारी, चारि तरहक अंचार, चटनी, खाजा, लड्डू, रसगुल्ला, पेनतोवा, दही, चिन्नी आदि आदि। 

                     नओत पड़ि गेल रहइ।कच्ची दिन गाम के लोक सभ एकटा टैर गाड़ी ठीक कय ओही सं गेलाह। पक्का दू कोस। दिगवा (दिगम्बर) के सेहो कोनो तरहें जगह भेट गेलै गाड़ी पर। दोसर दिन सांझ होइते मेघ लादि देलकै। लगै आब बरसतै कि तव बरसतै। ढ़नढनाइ सेहो। बूढ़ सभ बिचारलनि जे एना मे गेनाइ ठीक नहिं। दिगवा के माय निरास भ गेली। भोज खेतनि बेटा आ पेट भरतनि हुनकर! मसोमातक बेटा कत’ सं रसगुल्ला -पेनतोवा खाइके सपना देखत! एहने अवशर पर सख पुरै छै। कोनो तरहें तीन -चारि टा चौदह -पन्द्रह बर्षक किशोर सभ के तैयार क’ ओकरे सभक संग दिगबो के पठा देलखिन। बरका लोटा हाथ मे थमा देलखिन।

              राइत के बारह बजैत रहै। दिगवा के माय  सांझे दिनके बंचलाहा भात खाय गेली त’ देखली जे बिलाई पहिनहीं  हाथ साफ कय देने रहै।। भुखले सुइत रहली।  तखने क्यो जोर जोर सं केबार पिटलकैन। लाइन त’ सांझे सं गोल, हवा बिहारि मे डिबियो मिझा गेल रहै। कनि कनि बर्षा एखनो भैयै रहल छलै। समय एकदम विकराल लगै। केनाहिंयों क’ केबार खोललखिन। के...!दिगवा! की भेलौ! भाइग अएलिही !भोज नहिं खेलही! एकदम भीज गेलैं रौ! 

बड्ड जोड़ आंधी -तूफान अएलै। तहि पर सं सूपक सूप पाइन उझल’ लगलै। सभक पत्ता उड़िया  गेलै! कपड़ा -लत्ता, लोटा सभ उड़ि गेलै। देखही न कोनाहिंयों भागैत भागैत अएलहुं अछि, दिगवा अपसियांत भेल कहलकै। 
दिगवा के माय कपार पिट लेलथि। दुखिये के सब दुख! एगो लोटा छल, सेहो गेल! साउस ससुर बला साबिके के एकटा फुलही थारी आ एगो डावा सनक लोटा हमरा हिस्सा भेटल।वैह धन! वैह बीत। वैह निशान! आई ओहो गेल। हे दीनानाथ! 

गै माय सुन न! तों त’  अहिना सब चीज मे दीनानाथ दीनानाथ कर’ लगै छैं। एगो थारी ला। दिगवा कहलकै।  से कियै, “दिगवा के माय पुछलखिन “?

जखन बिहारि ऐलै ने तखन खाजा परसाइत छलै। लड्डू पहिने परसा गेल रहै। लोक सभ जेना तेना खाइत रहै, आ हम सबटा के लोटा मे कोंचैत गेलहुं। ले सब। दू टा खाजा आ नहिं बेसी त’ पनद्रह टा लड्डू त’ होयवे करतहु। 
दिगवा माय के त जेना आंइखे चोन्हरा गेलनि। कहलखिन, “ रुक तौला मे सं सुखलाहा आमक अंचार निकालने अवैत छी! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 15-07-2019

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