फेल भ' गेलहुं (मैथिली कविता)

मित्रगण अपनेक सेवा मे एकटा अनुभव प्रस्तुत क' रहल छी। नीक लागै या बेजै ,नि:संकोच लिखब से आग्रह।

                       फेल भ' गेलहुं

परीक्षाक ड्युटी छल
हाॅल में पहुंचलहुं 
काॅपी बांटि देलियै
घंटी पड़लै
प्रश्नपत्रो द' देलियै
कनी दम धेलहुं 

        देखलियै केओ नहिं
        लिख रहल छल
        ब्यंग्य केलियै
        आव बुझू
        क्लास एटेंड नहिं कैलाक फल 
        कंनी कुढ़लहुं
        अहिना हैत।

फेर हम चुप
ओहो सभ चुप, स्थिर
मोन में आयल
देखियौन्ह ने
केहेन भोला बाबा बनल छथि
जनै छथि सत्यानाश तक
मूंह जे बनौने छथि
जेना हिनका सभ सं मासूम केओ अछिये नहिं

        अखनों सभ शांत 
         हमर बेचैनी बढ़ल 
         तखनहि एकटा पूछलक 
         आव लिखू?
         हम खसलहुं पाताल मे
         सभ फस्ट ईयर के छात्र
         प्रतिक्षा मे छल
         कहबै त' लिखत
         हमर तीस बर्षक अनुभव 
         बेकार गेल।

 हम आई फेल
बच्चा सभ पास
ओकरा सभ के लोक सभ
की की ने कहै छै
परन्तु आई हमरा ज्ञान भेल
ओ जे देखाइयै
से मात्र बाह्य रूप 
अन्दर सं सभ मोम
अत्यंत कोमल
अत्यंत मासूम।

प्रमोद कुमार (नेहरू)
पांडिचेरी
दि. 01-12-2018
सायं-07-45बजे

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