आशक दीप (मैथिली कविता)
आशक दीप
दीपक वंदन वार सजौलहुं
आशक दीप जरेलहुं आइ
अन धन लक्ष्मी घर औती
दालिद्दर त’ भगतै आइ।
फूल मिठाई मेवा ओ मिश्री
मंगल थार सजा क’ रखबै
स्वागत करवै धन लक्षमी के
सुख सौभाग्य मांगि लेवै
अंधकार नहिं घेरतै कहियो
आशक दीप जे जरतै आब
महल ईजोत जं भरल रहतै
मरैयो मे दीप चमकतै आव
बालक रहै उल्लस सं भरल
बृद्धक भाल पर संतोषक रेखा
गृहणिक मांग सुहाग सं चमकै
जेना तिमिर मे ज्योतिक रेखा
प्रमोद कुमार पांडिचेरी
27-10-2019
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