चाहक महिमा (मैथिली कविता)
चाहक महिमा
चाह पर चाह
वाह भाई वाह!
आगां में पकौड़ी
ताहि पर सं चौप
सभ केओ खाइ छथि
जिनको नहिं रास
चाह पर चाह
वाह भाई वाह!
ठोढ़ो पाकि गेल अछि
जी भेल सेहर
जाड़े ठिठुरै छी
बस एक्केटा आस
चाहे पर चाह
वाह भाई वाह!
अंतड़ी सिहैर गेल
जठराग्नि गेल मरि
खर्चो नहिं बेसी
वाह भाई वाह
चाह पर चाह!
चारि गोटे बैस गेलाह
खाके सन सन बात
सस्ते मे मुखिया
हाथ में तास
चाह पर चाह
वाह भाई वाह!
पाला पड़ै वा
अवै शितलहड़ी
बहुत गोटे कांपै
हमरा अछि ठाठ
चाहे पर चाह
वाह भाई वाह!
एम्हर छथि गृहणी
भेल तवाह
कत्ते पीता आव ई
चाह पर चाह!
नहिं रहै चिन्नी
तैयो चाह
नहिं अछि दुध
तैयो वाह
दिन भरि चाह
बाप रौ बाप!
चाह पर चाह
वाह भाई वाह!!
प्रमोद कुमार उर्फ" नेहरू लाल दास"
पांडिचेरी
दि.11.01.2019
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