चारिम बियाह (बीहनि कथा)

चारिम बियाह
(  बीहनि कथा )

टहलैत रही। पाछां सं क्यो हाथ पकरि लेलक।  घबरेलहुं, मुदा जखन मुंह देखलियैन्ह त आश्वस्त भेलहुं। प्रो. मुरलीधरन छलाह । हाथ पकरने एकाएक आंखि सं धार बहा बहा क' कानय लगलाह। पुछलियैन्ह, “ की भेल? ऐना कियै कनै छी?”
कनि स्थिर भ' कह' लगलाह। प्रमोदजी हम आब भीख मंगै छी …!! विश्वास त' नहिं भेल मुदा हमर सीनियर छलाह आ बड्ड नीक लोक सेहो । अवाक भय मुंह तकैत रहलियैन्ह । कह' लगलाह-“राक्षसनी छल ओ ! सबटा लूटि लेलक ।“ हम पुछलियैन्ह, के? वैह अहांक नवकी कनिञां ? ई हुनकर दोसर पत्नी छलखिन ! आ प्रो.साहेब हुनकर चारिम पति। छरहर, उमर यैह तीस-पैंतिस, गोर नार, हिन्दी ,अंग्रेजी आ तमिल बजै में फरोस । परित्यक्त प्रो. साहेब जाल मे फंसि गेलाह। रिटायरमेन्ट के पैसा सं खूब नीक घर बनबौलकैन्ह आ सबटा पाई ल' अपन तीन तीन टा मुसतंड भाइयक सहारे ब्लैंक चेक बुक पर दस्तखत करा हिनका घर सं बाहर धकेल देलकैन्ह।

 डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,17-2-2020

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