मां आइ अहां होइतहुं (मैथिली कविता)

मां  आइ अहां होइतहुं
(अन्तर्राष्ट्रीय माता दिवश पर सदानीरा स्व. मां के समर्पित) 

मां प्रणाम! 
एना कियैक भेलइ
जहिया बुझलियै ,जनलियै 
मायक छायाक शीतलता 
स्पशर्क उष्मा ,ममताक कोमलता 
बहुत देर भ’ गेल रहै!
आव बुझना जाइयै 
अहिंक हाथे परसल जलखै, खेनाइयक जिद्द 
आंचर तर घुसि सब पीड़ाक ईलाज 
भूख त’ आवो लगैत अइछ 
माथ पहिने सं बेसिये दुखाइयै 
 टांगो बेसिये टटाइयै
मोन करैया' जोर सं चिकरी मां...! मां....! 
भोकारि पारि क’ कान’ लगै छी
कोनो दौगा मे! 
काश! आइ अहां रहितहुं! 
छाया विस्तृत अछि 
मुदा अहांक आंचरक नहिं! 
सेवाक हाथो अछि मुदा ओ छुअन नहिं 
तिमन त’ एखनो अछि 
मुदा अहां के दिक्क करि करि 
ओहि मे जोरल स्वाद नहिं
लाखों अछि मुदा ओ दुटकही नहिं 
एक थप्पड़ लगा अहां मेला देखै लय देने रही 
अहां हरदम हमर लाठी बनलहु 
आइ हम अहांक लाठी बनितहुं 
मां!!! काश आइ अहां होइतहुं!! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 12-05-2019

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