अहा बसंत (मैथिली कविता)

अहा बसंत
आह  बसंत, वाह बसंत  पहिरने  पलासक  माला    बसंत
कचनारक ओढ़नी  ओढ़ौने  मादक बसंत मारक    बसंत !

पुरवा   बसंत   पछवा   बसंत   मृदुल  मधुर बयार   बसंत
नहिं शीत बसंत नहिं ताप बसंत छथि मात्र अह्लाद बसंत !

मंद  समीर उर बिच  पहुंचि  कलिक  पंखुरी खोलैत बसंत
खिलखिलाइत कुसुम सौरभि बांटयभ्रमित भ्रमरउनमत्त बसंत !

वन  उपवन   विचरैत  बसंत  नर  नारी  उर  पैसैत   बसंत
कोकिल  कंठ पंचम बसंत  मज्जर  मे मद लाबैत  बसंत !

भरल बखार कोठी बसंत  ललनाक  पायल  रुनझुन बसंत
उषा  बसंत  संध्या बसंत पल्लवित पुष्पित तरुवर  बसंत !

खग मृग मुख चमकैत बसंत, कल कल निनाद सरिता बसंत
लाल   बसंत   पियर   बसंत   भाल  पर  पसरल  गुलाल  बसंत !

तरुण  बसंत   तरुणी   बसंत   युवा आ  युवती  तन  मन बसंत
अधेरक   तन   उद्विग्न   बसंत   बृद्धक   मन  अफसोस   बसंत !

परिणिताक  मन  उल्लास   बसंत   विरहिनी  मन संताप  बसंत
तैयो   सबहक  आस   बसंत  तहि   लेल   सबहक  राज  बसंत !

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,08-02-2020

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