कोरोना युगक सपना (मैथिली हास्य व्यंग)

करोना युगक सपना

बिपत्ति  काल  मे चैन  ने  भेटय  नीन ने आबय एको  रती
जखनेमुनाइतअछिआंखि कनिञों त'उठबै सपनाधुकधुकी 
राइत जे  हम  देखलहुं  सपना  से  कहू कि बाबू सही सही
गंवई  गाम  मे आवि  गेल  छी  खोडषी  एकटा ठाढ़ छथि
अएली  बहिना  करैत  दोसरो  अप्सरा  जेना  ठाढ़ होइथि
आंचर  कनि  ससैर गेलैन्ह आआंखि भ'भेलैन्ह लाल कनि
लाजे गाल लाल भेलन्हि आ खधिया दुनु दिश उगि गलैन्ह
घैल  लेने  दुनू   पनघट  चलली   चरवाहा  के  नजरि  गेलै
चट  द बंशी  बजब’  लगलै, भैंस के  कनि  उमका  देलकै
एकटा  मलहा  माछ   फंसौने   चमकाबै  छल  मुंह  अपन
आंखि  टंगेलै   दृष्य  मधुर   पर  जाल  सं  माछ  परा गेलै
जाधरि बुढ़वा चश्मा पोछितै आकि नकली दांतखसिपड़लै
भक सं नीन टुटि  गेल आ पकलाहा केश पर नजरि पड़ल
ओहि सं आगू  बाजब  त' कोरोनाक  मारल  भेटत  थुड़ैल 

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,9-5-2020

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