एकता (मैथिली कविता)
एकता
एसगर मानव के की कही भय दिशाहीन बौवाय
एसगर मोती कतवो चमकय माल्य नहिं बनि पाय।
एक रही मजगूत बनी एसगर काठी टन सं टूटै
जँ काठी संगहि रहै पावि लाठिक बल ईतराय।
एकटा भीम कतवो बली ओ जीत ने सकथि लड़ाइ
जनता मे जँ एकता रहय दुश्मन के देता मिटाय ।
आऊ बढ़ू संगें रही विन बातक नहिं धुआं उड़ै
डेग मे डेग जे मिला क’ चलब लक्ष्य जीवन के पैब।
आखर मिल आखर शब्द बनावै शब्द सं शब्द मिल गीत
बन्है गीत लय मे जखने बनय मधुर मधुर संगीत।
कहै प्रमोद सुनू यौ बन्धु एसगर बूंद क्षण मे उड़ै
संग साथ रहि धारा बनै पावन बनि पूजल जाय।
प्रमोद कुमार
पांडिचेरी ,02-09-2019
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