क्षणिकाएं (मैथिली कविता)
क्षणिकाएँ
1.पद चिन्ह। 4.बताह
कहलैथ बुढ़ा चच्चा जाइ छथुन्ह
पदचिन्ह पर चलिह’ प्रणाम करहुन्ह ने
जीवन भरि सैह कैलहुं बाबू यौ!
की भेटल! पचास टा टाका दै छथिन
नकलची बनि बैसल छी! ल' लियह?
धुर बताह!
2. नौंत
5. माछ भात
पंडिजी नौंत दै छी। बच्चे सं हम एकरा
आह! आऊ आऊ बैसू बैसू माछ भात खुवौलियै
की खुवैब! देखै छियै केहन सुन्दर
चूड़ा दही। पांच हाथक भ' गेलै
हम बम्बई रिटर्न छी हम त' सागे भात खुवौलियै
पिज्जा बर्गर खाइछी केना सात हाथक भ' गेलै!
ठीक छै
पुछि क’ अवै छी।
3. सुखैल राखी 6. हाथी उलटि गेलै
भैया राखी भेजलौं अछि दादी... हाथी उलटि गेलै
बड़ नीक की.....?
पूरे पचास रुपैया वला पापी मरि गेलै
ठीक छै नहिं... हाथी उलटि गेलै
एकावन रुपैया भेज देब नीक भेलै! छलो बड़ पापी!
सैह ने!
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 14-08-2019
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