कौआ खो मेना खो (मैथिली कविता)

कौआ खो मेना खो 

कौआ खो 
मेना खो
तितिर खो 
बगरा खो 
मुँह पोछि ले
आव खेल’ जो 

यैह देख देख क’ 
पैघ भेलहुं हम 
आव त’ अपने भात 
अपने हाथ 
नहिं कोनो मेना 
नहिं कोनो बगरा
आ ने तितिर 
सब भात कौआ  
खेबैं त’ खो 
काज कर’ जो 

कमा क’  आन 
तब भात सान 
आव नहिं बौवा 
लोक कमौआ 
तोरे बगरा
तोरे तितिर 
खोलने छौ मुँह 

माय ' गई माय '
आवि जो तूं
फेर सं दू कर 
खुआ जो तूं। 

प्रमोद कुमार 
पांडिचेरी, 01-12-2019

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