नेनाक प्रश्न (मैथिली कविता)

नेनाक प्रश्न 

नेना पुछलकै माय’ सं 
फानि फानि बगरा चलै 
फेर फुर्र द’ उरि जाय 
मेना दिन भरि दाना चुगै 
अपने खयने जाय !
कियै ने ओकरा कोठी झंप्पा 
कियै ने घर घरारी गई 
कहियो चुन चुन अहि गाछ पर 
कहियो आन गाछ चलि जाय! 
नहिं छै ओकरा कपरा लत्ता 
आ ने कोनो सख सिंगार 
तैयो कतेक सुन्दर लागै 
गाबय गीत मल्हार! 
रौ बौवा रौ बच्चा सुन 
नित कमाय नित खाइछै ओ सभ 
नहिं संचय ओ जानहि 
तईं नहिं लोभ आने मोह 
नहिं कोनो झगरा झांटी 
आ नहिं कोनो बखरा बांट 
कथी लै झंप्पा कथी लै कोठी 
कथी लै कैंचा आ कथी लै नोट 
नहिं सारी साया ओ जानय 
नहिं जानै छै पैंट आ कोट 
नहिं व्यभिचार नहिं ओ भ्रष्ट 
नहिं जानय बैमानी शैतानी 
बड़ निचैनक जीवन छै ओकर 
तहिं नै चिंता केर लकीर 
तैं ओ हरदम सुन्दर लागै 
गीत गबै नित दिन। 

प्रमोद कुमार 
पांडिचेरी, 04-12-2019

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