ममता मयी (अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष, हिन्दी कविता)

पौध भी है
कलियां भी
कुसुम वही, बगिया वही
अद्भुत फूलों से सजी
डलिया वही
सुगंध फैलाती, सकून लाती
प्रेम-प्यार के गीत गाती
झुन-झुन के स्वर लहराती 
आंगन की शोभा वही
ममता वही, दया वही
अनवरत बहती
प्राणमयी नदिया वही
स्पंदन की कोमलता 
आंचल की छाया
सुधा की धारा 
लोरी सुनाती,  नींद गंवाती 
उर में धरकती
जीवन की मिठास वही
गाऊं कितनी गाथा
कोई अंत नहीं 
हे धरा! हे माता! 

प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पांडिचेरी, 08-03-2019

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