निश्छल प्यार (मैथिली कविता)

निश्छल प्यार 

गरबहियां देने जारहल अछि 
दूटा छोटकी छोटकी बच्ची 
सहोदर बहिन 
जौंआं सन लगै छै
दू वर्षक छोट पैघ 
उत्साह अपूर्व 
हर्ष सीमा नांघि रहल छै 
सड़क के काते काते 
सम्हरि सम्हरि क’ 
रसे रसे 
माय’ सं भेटल रुपैया सं 
चौकलेट किनतई, 
दुट्टा 
लगे के दोकान सं
रंग बिरंग के गाड़ी 
सन्न सनि निकलि जाइछै 
बगल सं 
बड़की, छोटकी के घिच क’ 
सटा लै छै अपना सं 
छोटकी के चाही दुनु चाकलेट 
झगड़ा भेलई
छोटकी के गाल पर 
एक चटकन लगलै
गाजा बाजाक संग रूदन शुरु 
मान मनौवल फेल 
दन्न सनी एगो गाड़ी बगल सं भगलै 
बड़की झट सनी छोटकी के घीच 
करेज मे सटेलकै
ले तोंहीं दुनु चौकलेट खो 
सड़क के बीच मे नहिं जो 
हमरा चाकलेट नहिं चाही 
घर अएलै 
छोटकी चुसै छै चोकलेट 
बड़की लगै छै भभा क’ कानय! 
हमरा चाकलेट नहिं 
बहिन चाही! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 14-06-2019

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