हमर गाम आ हम (मैथिली कविता)
हमर गाम आ हम
(अपन जन्म दिवशक अवसर पर माय’ मैथिली आ' मिथिला कें हमर सादर भेंट)
गाम आयल छी
मुदा भुतलायल छी
डिह डाबरक अवशेष!
चारू दिश सं प्रश्नक बौछार
उत्तर की देवै
परेलहुं पिपरक गाछ तर
तरुवर त’ वैह छथि
फैलाव बढ़ल, हाथ पैर किछु
सुखैल,सिडैल,आंइखो जेना पथरायल!
बहुत देर लगलैन्ह चिन्है मे
आव’! बैसह! छाया आव हम की देबह!
हां, सकून भेटतह!
तकैत छी चारू दिश
बुढ़वा महादेव के रस्ता
खरंजा बैस गेलैया'
सड़क सभ पिच भ’ गेलैया'
रुप -रंग त’ ओहिना
लोक सभक चेहरा बदैल गेलैया’
घोर निराशा!
दू पहर बित गेल
लोक सभ आयल, चलि गेल
ओही मे सं क्यो पागलक संज्ञा देलक
आव हमर वैह नाम भ’ गेल
छौंरा सभ चारु कात सं घेरने अछि
क्यो कनि चाउर भुजल
त’ केओ कनि मुरही,एक टुकरी सोहारी
आगु मे फेकलक
एकटा बच्चा पुछलक
पाइन पीव!’ आ एक गिलास पाइन द’ गेल!
बुढ़वा पिपर कनि खुश भेल
एकटा बालक, मुंह मे धूरा लेपटल
लोर टघरै के निशान गाल पर
लागल जेना पैसा मंगला पर माय’ मारने होइ
चट दनि दूटा चौकलेट
जे दुनु मुट्ठी मे कैस क’ पकरने रहै
हमरा दिश फेक क’ कहलक
ले पागल! खा’ले, भुख लागल हेतौ
आ’ सभ लंक ल’ क’ पड़ैल
तखने सं मोन गद् गद् अछि
रहि रहि आंईख भैर जाइयै
गर्व होइयै
मिथिलाक संस्कृति बंचल अछि!
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पांडिचेरी ,07-03-2019
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