पानि बिच प्यासल (मैथिली कविता)

पाइन बिच प्यासल मरै छी 

हम की गीत लिखू यौ बाबू बाढ़ि  मे सांस  गनै  छी 
सौंसे मिथिला पाइन मे डुबल प्यासल  हम मरै छी
बच्चा बुदरुक काहि कटैया’ बृद्ध सब नित कुहरैया 
युवक  युवती  बाट  तकैया  मदद  ने  कोनु  अवैया 

          हम की गीत लिखू यौ बाबू बाढ़ि मे सांस गनै छी। 

बान्ह  बनल अछि शरण स्थली सेहो भांसल जाइयै
निस  दिन  पाइनक  जोर  बढ़ैया  सांस हमर घटैया 
कतय सं  आनू  दवाई -दारू पथ्य  लै  वीमार मरैया 
घोंकल  पाइन पीवि पीवि  क’ नीको  बिमार  पड़ैया 

                                  हम की गीत लिखू...............। 
नहिं छप्पर  ने छतरी  कत्तहु झर-झर पाइन झरैया 
कुकुरो  बिलाड़ि  थर थर  कांपै ककरा  के  देखैया 
बर  बर आस  सरकार  बनौलहुं ओहो  नहिं तकैया 
नेता  सभ  नेंगरी   सटका  क’  कोना  कुनु  तकैया

                               हम की गीत लिखू यौ.............। 

हे  माता  सब   भाभट   समटू   पुत्र   अहांक    मरैया 
नहिं विधाता आने  दाता अहिंक  आश   बंचल  अछि 
आंखि मुँह  पोछि कोर उठा  क’ गला लगा लिय अम्बे 
बेकल भेल ई पूत अहांक मां बाट अहिंक तकैत अछि। 

                                  हम की गीत लिखू यौ........... ।

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 28-07-2019

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