वह दीप कहां गया (हिन्दी कविता)
वह दीपक कहां गया
एक नन्हा सा दीपक
आधा भरा तेल
छोटी सी बाती
टिमटिमाता प्रकाश
गीत गाता हुआ
मोतियों को पिरोता हुआ
एक माला बना गया
कई दीपों को जला गया
रौशन हुआ जहां
वह कहां गया !!
दीयों की ढेर है
कंटर भरा तेल है
बाती की लम्बाई ?
कौन नापे
खेल है ??
प्रकाश ठेलम ठेल है
गीत है, संगीत है
लेकिन कहीं किसी का मेल है?
बस रेलम पेल है
साज है आवाज है
सुर हीन गीत है
कोई तो वह दीपक बन जा
बिखरे मोती समेट कर
टूटे तारों में संगीत भर जा!!
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,06-01-2020
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