विवाह (सपना होइत सच) मैथिली कविता

विवाह :  सपना होइत सच

सब लै त त्योहार छलै 
नाच गान आ भोज छलै 
कपड़ा लत्ता गहना जेबर 
सबटा के ओरियान भेलई
दू जन बन्हा गेल एक गांठ मे 
नव जीवन प्रस्थान भेलई
नव उल्लास 
नव नव सपना 
कखन भेल भोर 
कखन भेल सांझ 
बुनेलै हरदम ताना वाना
केहन अछि करघा 
केहन अछि डोरा 
नहिं ओकर कुनु लेखा जोखा 
सपने सन सुन्दर 
बनलै घर 
पिया के प्रीत 
प्रिया के छन छन 
स्निग्ध उषा सन सुन्दर आभा 
हे प्रिय.....!  हे प्रिया......!
पवित्र परिणय मे बन्हा गेल हम 
आऊ! बूनी 
मधुर, सुन्दर, स्वर्निम आशा! 
सपना मे हम बिचरी आव 
पांइख मे भरि हवा खुब जोर 
उड़ब गगन मे खग समान हम 
छू ली क्षितिज केर ओर छोर! 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 01-07-2019

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