धन्य कोरोना (मैथिली बीहनि कथा)

धन्य कोरोना
( मैथिली बीहनि कथा)

हे यै ! सुनै छी?
की ..? कहू ने। बहिर त' नहिं छी !
कनि हमर केश काटि देब ? देखियौ ने अहां सं कनिञें छोट हेतै आव। इ कोरोना भाउल बना देलक !
त' चिक्कन चुनमुन कहिया छलहुं ?
हे एक त' अहि दुष्टाक मारल तहि पर सं अहांक जड़ल गप्प ! कनि हुक् हुक्की जे बंचल अछि ओकरो अहां ….!
हे शुभ शुभ बाजू !
लाउ ! कैंची आ कंघी दिय' ! खराप भेल त' हमरा नहिं कहब !
नहिं नहिं कोनों बात नहिं । अहां काटू त' !
लिय' ऐना मे देखियौ ! केहेन भेल !
उं हूं ! ऐना मे नहिं देखब ! एतेक काल तक अहांक  कोमल हाथक स्पर्श के हम ऐना के कियै भेंट चढ़ा दियै ?
ओहो त' आब बुझलहुं ! जानि क' अहां एतेक काल सं हमरा कियै ओझरौने छलहुं ! कनि एम्हर.. आ हं … कनि ओम्हर ! कनि छोट करियौ त' कनि सोझ करियौ! 
चलू ! बदला में हमहूं अहां के केश झारि दैत छी!
ईंह ! मुंह देखियौन्ह ने !!

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,4-5-2020

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