फेर सं बच्चा बनि जाइ (मैथिली कविता)

फेर सं बच्चा बनि जाइ

मोन करैया 
फेर सं बच्चा बनि जाइ 
धूरा मे ओंघराइ 
माइट मे लेटाइ 
पाइन पड़ै त'
दौड़ दौड़ नहाइ 
गल फुल्ला बेंग पर 
ढेपा फेंकी आ
अपने मुंह पर पाइन पराबी 
जार मे सुइटर नहिं पहिर
किट किट दांत बजाबी 
माय’ कान पकरि क’ 
नाक पोइछ दियै आ 
कैस क’ गांती बान्हि जाय 
लू चलै त’ 
घर नहिं बैस क’
रने वने वौवाई
बाबू सं गाल पर 
चटकन खाइ 
कनि काल कानि क’ 
सिट्टी बजाबी आ
माय’ के कोंचा मे जा नुकाइ 
कखनों पर्रु के नांगरि घिची 
त’ कखनों कुकुरक बच्चा संग खेलाइ 
स्कूल जाइ 
आ सब चटिया के 
मोनीटर बनि जाई! 
जाइछी बच्चा संग मिल क'
फेर सं बच्चा बनि जायब। 

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास 
पांडिचेरी 19-08-2019

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