किससे मांगूं क्षमा आज मैं ( हिन्दी कविता)
किससे मांगूं क्षमा आज मैं
किससे मांगूं क्षमा आज मैं
जिससे मांगूं वही सुनाता
फंसा गुनाहों के दलदल में
जा आगे बढ़ मूरख!
धरा से पूछा,पूछा नभ से
वायु, अग्नि और जल से
तू ने ही मुझे बनाया
सब मैं ने बर्बाद किया है
तू ही मुझे क्षमा दे!
नहीं नहीं नादान आदमी
कहां बना पाये हम वैसा
जैसा हमने चाहा
तू ही हमें क्षमा कर बन्दे
गलत किया है हमने!
थक हार बैठा था
क्यों न अपने से ही
अपने किये का क्षमा मांगूं
क्षमा करो हे अन्त: मेरे
तुम्हें जलाने का दोषी हूं!
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पॉंडिचेरी, दि. 29-01-2019
Pramod_drpk@yahoo.co.in
Comments
Post a Comment