मुदित मन (मैथिली कविता)

मुदित मन

आई हम देखल प्रकृति कें
खेती मे लागल प्रत्यक्ष
कतहु बहा क' झील ओ झरना
कतहु बहा क' नाल, नदी
कतहु उगावै पहाड़ पहाड़ी त' 
उगेने छथि कतहुं चिड़क वन ओ घासक जंगल
कतहु लहलहैत खेत
कोनो करिक्का त कोनो उजरा बादल
नुकाइत,छिपाइत,नटखट ओ चंचल
चुमै कखनो शीष तरुवर के,पर्वत के
चट द' धरतिक चरण पखारै
स्वक्ष पवन, उमंग अनंत
चरण धराक चुमि, बादल के ठेलै
त' खेलैत कखनो तरुवर के संग
कतहु हरिण ताकै स्तंभित
चिड़ै- चुनमुन्नी गोसाउनिक गीत गाबथि
कण- कण निर्मल
जन- मन कोमल
प्रकृतक कोर में बैसल हम आई
तिरोहित अछि मन
संतति के संग।

प्रमोद कुमार उर्फ "नेहरू लाल दास"
उमियम, शिलांग,( मेघालय)

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