स्वागत अछि सन बीस (मैथिली कविता)

स्वागत अछि सन् बीस

नहिं मलाल छै  ओहि गाछ के
              पात  जेकर  सब  झरि  गेलई
टुनरी  टुनरी  पनपि  रहल  छै
          नव किसलय सगरो छारि देतइ।

एक पल बीतय दोसर आबय
                यैह प्रकृतिक नियम बनल छै
निक   कैलहुं    नीके    पौलहुं
                नवो वर्ष  सैह  कहि रहल छै।

तरुवर शीतल छांह ओछेताह
                 पक्षी  ओहिना कलरव करतै
दसो   दिशा  आशा  सं  पूरित
                   उर्जा  प्रवल  शरीर मे भरतै।

धन धान्य स्वास्थ्य ओ शिक्षा
                कोठी भरि भरि  घर मे औतइ
शांति  सुरक्षा कांति  ओ आभा
                शहर  गाम मे चमक देखौतइ।

ढोल पीट कय बादल औतइ
                   खगताक देखि देखि बरसतै
फुलैल कुसुम सं सुगंध मांगि
                   मंद  बयार  घर  घर फैलौतै।

आंजुर भरि भरि पवित्र वारि सं
                नव भानु  केर स्वागत करबनि
उन्नैसक अनुज  बीस अहां छी
                बीसे   करी,    नेहोरा  करबनि।

डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,31-12-2019

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