जीवन दान (मैथिली बीहनि कथा)
जीवन दान
(बीहनि कथा)
मोहन के आइ भोरे भोर बड्ड भूख लाइग गेलन्हिं। अपन कनिञां के कहलखिन, “सुनै छी! कनि जल्दिये जलाखइ बनाउ। बड्ड भूख लागल अछि। कमजोरियो बुझाइए “
ठीक छै “तावे अहां चाह पीवू हम फुल क्रीम दूध मे मेवा सब दय क’ खीर बनौने अवै छी। “
कनिञां कनि कालक बाद खीर लेने ऐलखिन्ह, “कत' गेलियै! लियह। शीघ्र खा लिय’! कमजोरी बिला
जैत “ के खाइये खीर । मोहन ओतय हेता तब ने!
लगभग दू घंटाक बाद मोहन एकदम लटुआयल -पटुआयल अएलाह। “ ऐं यौ ! कत' चलि गेलियै। हम खीर नेने बैसल छी आ अहां टंडैली दै छी। देखियौ सेराओ गेलै! “
अहां गेलहुं खीर बनबय आ एमहर हमरा मेसैज आयल जे ‘O' निगेटिब खून के अबिलम्ब आवश्यकता छै। खून दाता क्लब के हम मेंम्बर छियै ने। एक बोतल खून दान कय आवि रहल छी।
ऐं यौ! “अहां अपने जान लै झखै छी आ गेलहुं खून दान करय! माय’ गे माय’ ! एहन मनुक्ख नहिं देखने छलहुं! “
“कतेक बजै छी! हमरा की हैत!
एकटा के जीवनदान देलियै तेकर खुशी अहां के नहिं होइयै!
डॉ. प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी
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