आई पिया मोर द्वार रे
आउ पिया मोर द्वार रे
बून बून बरसै छै बदरा आंखि मूनि हम ठाढ़ रे
नहू नहूं छुबै पलक मोर जं पिया करथि मनुहार रे
एकटा झोंका पवन मारै छै दोसर पियाक याद रे
मन रमलै पिया मिलन मे बसन भीजि भेल तार रे
पियू पियू कत्त पपिहा गावै कोइली कू कू गाछ रे
सखी सब के मन मगन भेल छै हमरो जनमल आश रे
नुका नुका चंदा मुंह दुसै बिजली जरि क' खाक रे
चातक के मुंह मोती बनतै जीतै जरलो घास रे
जतन कोनों कय अबियौ स्वामी स्वागत मे हम ठाढ़ रे
चान ओढ़तै कारी ओढ़ना हमर आंगन चाने चान रे।
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,12-6-2020
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