कुल देविक वंदना (मैथिली कविता)
कुल देविक वंदना
चन्द्र प्रभा मुख तेज प्रभाकर अष्ट भुजा उर कोमल गागर
चरण वंदना करै छी अम्बे कुल देवी ममता के सागर
कर कृपाण भाला शोभैये दुष्ट दानव थर थर कंपैये
दमन कैलहुं अहां दुख दारुण कें पुत्र अहां के सुख भोगैयै
हे जग जननी ईष्ट भवानी पुत्र अहांक हम छी अज्ञानी
फूल नैवेद्य लय ठाढ़ छी हम स्वीकार करु हे भवानी
टुअर भेल अछि पुत्र अहांक मां उठा कोर मे गर लगा लिय'
नेन्ना जानि सब क्षमा करु हे दया करु आव हे कल्याणी
आंजुर अरहुल अछि नोर नयन मे छवि निहारि नहिं पावै छी
माथ हंसोथि पुनि उर लगा कय जुड़ा दिय अहां हे जगदम्वे!
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 20-07-2019
Comments
Post a Comment