प्यासल बादल (मैथिली कविता)
प्यासल बादल
सिन्धु अरब मे जन्म लेलहुं हम
प्रिय भूमि मे पाओल प्रवेश
प्रिया मिलन के आश सजौने
पश्चिम घाट सं ठानल द्वेष
प्रिया मिलन मन संचित रहि गेल
प्रचंड वेग रथ बान्हल देखल
उदंड समीर, कुढ़नी दामिनि
बाट तकैत, बाटहि मे भेटल
अहिंक आदेश जानि क , प्रिय हे!
चारि मास धरि रण- वन घुमलहुं
कतहु क रिमझिम,कतहु क भारी
बूंद- बूंद या धार बहेलहुं
सखि सभ के झूला पर झुलैत
गीत सुहावन गाबति देखल
वन बिच मोर नाचि रहल छल
मुख किसानक चमकैत देखल
जड़ल दुईभ, झुलसल झड़- झांखर
हरियर नहिं, पांतर, चड़- चांचड़
बुंदक आश में चिरई, चुनमुनि कें
'पछवा' सं कंठ जरबैत देखल
एहन चंठ पवन नहिं देखल
नहिं रुकल, नहिं बैसल क्षण भरि
पटकि देल हिमराज चरण मे
हाड़- पांझि सभ तोड़ल, चुड़ल
अरुण प्रदेश मे गीत गावि क'
हिम प्रदेश के चरण पखारल
कामाख्या मांक' आरति करि हे!
बिछ गेलहुं हम समतल देश।
कत्तहु खापड़ि, कत्तहु बाढनि
कतहुं ' ऊक' के धाह सं जरलहुं
कम बरसलहुं तैयो सुनलहुं
अधिक बरसि ' शापित' भ' घुरलहुं
दग्ध हृदय, क्षीण भेल काया
भूख-प्यासक अनबुझ माया
बयस बीतल, पियास ने बुझल
प्रिय! आब मधुर किछ बाजू।
आब मधुर किछ बाजू!!
प्रमोद कुमार 'नेहरू'
पांडिचेरी
दि.21-12-2018
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