फाटल जेब (मैथिली कविता)

फाटल जेब 

मजदूर पुछलकै 
हे ईश्वर !
जेब कियै देलहुं अंगा मे 
देलहुं त’ टाका दितहुं ने! 
मालिक बोइन त’ दैया’ 
पहिने दस टकाक सिक्का दै छल 
कहलक बोइन बढ़ा देलियौ 
आव सब दिन 
दस टा एक टकाक कैंचा दैया’ 
भार बढ़ि गेल 
मोल ओतबहि के ओतबहि 
नित्ये जेब फाटि जाइयै 
कतेक दिन तक दर्जी 
फोकट मे सिवत 
सिलाई कमजोर छलै 
से आव नहि मानैत अछि 
आइ त’ मारैये लै दौड़ल 
तैं हे दाता! 
चाहे त’ अपन जेबी ल’ लिय’ 
आ नहिं त’ हे झोरा मे 
नोटक गड्डी पठाउ! 
जं दिक्कत हुए त' 
बैंक मे जीरो बैलेंस एकाउंट अछि 
ओही मे डायरेक्ट ट्रांसफर क' दिय '!

प्रमोद कुमार पांडिचेरी 27-11-2019

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