बलिदान (हिन्दी कविता)
बलिदान
याद है आपको
हजारों वर्षों का इतिहास
नहीं न!
कैसे याद रहेगा
हम बहुत भुलक्कड़ जो हैं!
चार दिन के बाद ही भूल जाते हैं
बलिदान का उद्घोष होता रहा
हम जान लुटाते रहे
लुटेरे आते रहे
गद्दी पाते रहे
देशी और विदेशी
किसी ने लूटा
किसी ने तोड़ा, फोड़ा
अस्मिता भी लूटा ,प्रतीक मिटाया
हम बलिदान देते रहे
लेकिन पन्ने में नहीं आये
गद्दारों ने पन्ने भर लिये!
हर युग में, हर समय में
जयचंद आता रहा है
आता रहेगा
वेचारा प्रताप, शिवाजी,
पृथ्वी, वोस,लक्ष्मी,भगत,
आजाद,राजगुरु
कितना गिनाऊं
बलि होते रहेंगे!
मातृभूमि के नाम पर !
अव तो लगता है
हमारे धमनियों में
पानी बह रहा है!
उठो हे वीरो!
अर्जुन बनो, गांडीव धरो
दुश्मन को रौंदो और
गद्दारों की चटनी पीसो।
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पांडिचेरी, 18-02-2019
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