शारदे वर दे (हिन्दी कविता)
शारदे वर दे
वीणा के तंत्रों में तुम हो
तुम् ही हो मुरली की धुन में
तुम ही कोकिल हंस तुम्हीं हो
मुझमें क्षीर- नीर गुण भर दे
हे मां शारदे वर दे!
बालक के किलकारी में तूं
तूं ही वेदों की ऋचाएं
अक्षर अक्षर विच्छिन्न है मानव
युग्म कर शब्द बना अर्थ भर दे
हे मां शारदे वर दे!
दशो दिशा में तिमिर घोर है
मूढ़ मनुष्य शिर्ष को चूमे
ज्ञान का योगी दर दर भटके
माते दिशा प्रकाशमय कर दे
हे मां शारदे वर दे!
कल कल बहती निर्झरनी में
मानव के हृद स्नायुओं में
विष की धार रोककर माते
शीतल अमिय नीर बहा दे
हे मां शारदे वर दे!
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,29-01-2020
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