आशा के दीप
हमने आशा के दीप जलाये
तुम्हें अंधेरा पसंद है तो हम क्या करें
हमने दोस्ती का हाथ बढ़ाया
तुम्हें दुश्मनी पसंद है तो हम क्या करें
हमने तुम्हें पतवार थमाया
तुम्हें डूबना पसंद है तो हम क्या करें
हमने रास्ते दिखाये मंजिल की
तुम्हें भटकना पसंद है तो हम क्या करें
पूरा देश एक साथ है
तुम्हें तन्हा पसंद है तो हम क्या करें
जीते हैं, जीतेंगे देखना तुम
तुम्हें हारना पसंद है तो हम क्या करें
हम दौड़ेंगे, उर्जा भरी टांगों में
तुम्हें लड़खड़ाना पसंद है तो हम क्या करें!
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,05-04-2020.9.40pm
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