करोनाक भूत आ भविष्य



रे कोरोना खट्टा खट्टा
          भ'  गेलैं  तों  बड़ तीत
बाप चिनियां झुट्ठा तोहर
          बड़ नाटक करै छौ नीच।
  कत' रहै छैं क्यो नहिं जानौ
                       नहिं बुझले छै तोहर रूप
  पेट कत्तेकटा अनने छैं तों
                    कहिया मिटतौ तोहर भूख।
जे जनमेलकौ ओकरे खो
         जे  पठौलकहु  ओत्तहि जो
भारत के तों नहिं जानै दुष्टा
         क्षण मे करतहु तोहर भुर्ता ।
एक्कहि बूंद वैज्ञानिक अनतहु
                   तोहर लेश नहिं रहतहु कत्तहु
बापे  पूते  मरि  जैबैं  तों
                           भूत प्रेत मे जा बैसबैं तों।

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,21-04-2020

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