मन की बात


दिल ने कहा
मन से
मैं ठीक हूं
जिस घर में हूं
वहीं ठीक हूं
बाहर नहीं जाऊंगा
हवा गंदी है
बैठ जाऊंगा
तुझे जाना है तो जा
और मन चल पड़ा
दूसरा घर सुरक्षित कर लूं
कौन जाने !
बसंत आकर जल्दी चला गया था
एक बूढ़ा पेड़
आश लिये अभी भी खड़ा था
अव क्यों खड़ा है
गिरने से पहले
दूसरा घर देख ले
मेरे साथ हो ले
पेड़ ने कहा
मैं ने जड़ को कस कर पकड़ा है
पपड़ी के नीचे
जमीन अभी भी गीली है
कोपलें छूटेंगी
कुछ देरी हुई है
पर उदास नहीं हूं
काश ! मैं भी तेरे जैसा दृढ़ होता
मन वापस चल पड़ा !

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,11.04-2020


Comments