चौबटिया
हे चौबटिया
तीन बाट त’ देखल आव
चारिम बाट देखाउ ने
जन्म लेल,सभ माथ चढ़ेलक
अति दुलार,प्यार सभ कैलक
ईश्वरक त रूपे बनलहुं
कत’ की भेल,किछ नहिं जनलहुं
चट शैतानक पदवी पौलहुं
चटकन, मुक्का, भेट' लागल
भरि दिन दौरी, भरि दिन हांफी
क्यो निरसै, त' बौंसै क्यो क्यो
आव दोसर राह पकरायल हमरा
शरीर मे हृदयक बोध भेल बरका
कखनों लाल कखनो पियर
दुनिया हमर मिठगर नोनगर
कपार मे सटल कुदि क हमरा
कपूत, कुपिता आ' कुपतिक पदवी
आगां घुमलहुं, पाछां घुमलहुं
वाम दहिंन सौंसे भ’ अएलहुं
तेसर राह ओनाहिंयें बितल
चौबटिया पर आवि ठाढ़ छी
हे चौबटिया अहीं बताऊ
चारिम वाट कोम्हर द’ जाउ
अहीं शरण मे आबि बैसल छी
स्वर्ग, नर्क आ’ पृथ्वी बास
सभटा भोगि तजल सभ आस
मुक्तिक मार्ग शेष बंचल अछि
हे! चौबटिया वैह बताउ
हे! चौबटिया वैह देखाउ!
प्रमोद कुमार उर्फ “नेहरू लाल दास “
पॉंडिचेरी, 29-01-2019
pramod_drpk@yahoo.co.in
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