कोना हम मृत्यु पर नाचू

   

छाती फाटल हमर ओहि दिन
          निर्भयाक जहि दिन प्राण गलै।
चारि टा जीव टंगा गेल भोरे
          ओकरो प्राणक अवसान भेलै।

एकटा टांग टुटल ओहि दिन
           दोसरो आइ टूटिये गेल भाई।
हम संसारिक,  नहिं छी मसानी
           नाचू कोना क्यो दिय' बताय।

करोड़ों असुर देवता सब मारलथि
          रावण संग लाखों मारलथि राम।
फेर करोड़ों मरला महाभारत मे
         तैयो नहिं बदलल अछि परिणाम।

मनुख मात्र एक जीव बनल अछि
         सोच विचार के छोरि चुकल अछि।
भाय बहिन नहिं सूझै छै ककरो
          मात्र स्त्री पुरुष मे बंटा गेल अछि।

कलयुग जेना चोटी चढ़ल अछि
            प्रलय निकट  देखा रहल अछि।
हमत' देख रहल छी भाई सब
           सबहक गरदनि टंगा रहल अछि।

डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,20-03-2020








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