माधव कोना कठोर
माधव अहां कोना एहन कठोर
अहां शीतल श्रीखंड छी माधव
हृदय माखन सन उज्जर कोमल
आरक्त नयन अछि कमल द्वय तोर
माधव अहां कोना एहन कठोर !
साउन बितल शरदो चलि गेल
भरल चातक नयन अछि नोर
ताम झाम संग बसंत अएला
नाचैत अछि हमरो मन मे मोर
माधव अहां कोना एहन कठोर !
अछि अहांक कुंतल उमरल घुमरल
भान होइछ सद्यहिं बादल जोर
सुमन सौरभि सं भरल पूरल अछि
सुषमा सं आंचर भरि दिय' मोर
माधव अहां कोना एहन कठोर !
मज्जर गमकै छै कोइली कुहुकै
सुर पसरल छै महुआ चूबै छै
कुसुम कुसुम केर भंवरा चूमय
सखि हे हमर भंवराक नहिं ठौर
माधव अहां कोना एहन कठोर !
सोलहो कला सं चान अछि चमकैत
हम चकोर आइ कानि रहल छी
चहुं दिशा में चन्द्रिका छै छिटकल
अएलै नहिं हमर घर ईजोत
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