परिवार
एक खढ़
दोसर खढ़
तहि पर सं तेसर खढ़
घाम पसेना
तर बतर
टप टप टप, टप टप टप
हार पांजर हिलै छै
नहिं पसेना पोछै छै
उड़ उड़ उड़
फुर्र फुर्र फुर्र
एकटा घर बनै छै
चिड़ी चिड़ा मुस्काइ छै
दूटा अंडा गोल गोल
चिड़ी चिड़ा के मिठगर बोल
आइ जे सुन्दर भोर भेलै
चुन चुन चुन अनघोल भेलै
आइ अपन परिवार भेलै
केहन दीव संसार लगै
चिड़ी के मन अह्लाद भरल
चिड़ा के उर अनुराग भरल !
नाचि रहल छै पत्ता पत्ता
गाछक त' सब दुख निपत्ता !
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,27-03-2020
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