बनि जाइ कागज पर रेखा
नहिं बनी हम बिच धार मे
बहैत नाव के खिंचल रेखा
आ नहिं बनी हम अकाश मे उड़ैत
राकेटक बनैत मिटैत उज्जर रेखा
नहिं चली खिंचल रेखा पर
लीक पर चलैत बड़द जकां
जीवन भरि हरपेटा खाइत
नित नव बहलमान के
समर्पित अपन जीवन जकां !
नहिं बनैब हमरा हे बिधना
दू देशक बिच खिंचल रेखा
किन्नहु नहिं बनी हम
परिवार के बांटैत…. लक्ष्मण रेखा
हे बिधना ! जं बनौलहुं विधि सं अहां
नहिं व्यर्थ होइ, किछु अर्थ दिय'
कागज पर रेखा बना क' खिंच दिय'
किछु अर्थ भरु
नहिं व्यर्थ करू
जॅं विशिष्ट छी,
मानव छी !
त'
कनि मोसि दिय'
कलम दिय'
कागज दिय'
खिंच रेखा हम अर्थ भरी
ओहने हमरा अहां कर्म दिय' !!
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,27-02-2020
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