काकी गीत
(मित्र लोकनि, हम एकटा गीत लिखवाक प्रयास कैलहुं अछि। अहि गीत मे ओहि तरहक ब्यक्तिक मनोभाव परिलक्षित कैल गेलै, जे वर्षों पहिने जीवन यापनक क्रम मे गाम छोरि परदेशी भ’ गेलाह। बाल -बच्चा सभ पढ़ि -लिखि, विवाह दान कय आन आन ठाम जिवन जी रहल छथि। आव ई दुनु गोटे बूढ़ आ असमर्थ भ’ गेल छथि। प्रतीकक रुप मे कौआ के अपन मोनक उद्गार सुनवैत अत्यंत बृद्ध अपन काकी के संदेश पठवै छथिन)
काकी भेजलहुं हैं कौआ के गाम यै
कनि बथुआ पठा देब
पठादेव काकी सेरसो के साग यै
कनि पटुआ पठा देब ।
तिलकोरक पात भेजु, भेजू एरकंचन -2
भेज दिय’ मुंगरी माछ यै
कनि घौका पठा देब।
कत्तेक भार आयल कनिञां के गाम सं -2
भेज दिय’ पान ओ मखान यै 2
कनि चूड़ा पठा देब।
लाले लाले धोती खाजा ओ लड्डू 2
भेज दिय’ लाले रंग पाग यै
कनि दही पठा देब।
भरि भरि पथिया, भरि भरि मौनी2
काकी भेज दिय’ सिनेह दुलार यै
कनि बड़ी पठा देब।
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 30-03-2019
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