सूतल राजा, मरैत प्रजा

               

हे भगवान खोलू आंखि
जकरा देखि देखि भाल चमकैया
वैह चमकी सं मरि रह’लै
नित दिन गिनती बढ़ले जाइयै
क्यो निरीक्षण कर’  अवैया'
क्यो रिपोर्ट झट मंगवैया
ए .सी घर ए. सी  कार
शान ओ शौकत के ब्यापार
ब्यापारी ई राजा बड़का
दय आश्वासन चमकी गोल
किछु टाका छै लू के मोल
पाई फेक क’ चलैत बनैत अछि
चमकी सं मरैया बालक
युवा वृद्ध के खाइया लू
हे ईश्वर अहां की करै छी
की अहूं छी बैसल एसिये मे
छोड़ि आलस अहां बाहर निकलू
बुझवै जखन लागत लू!

प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
 पांडिचेरी 18-06-2019



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