प्रेमक बन्हन नहिं टुटै
प्रिय! सुनै छी
की.. कहू ने
सुनिते त' ऐलहुं अछि
हे ! दुखी नहिं होउ
कनि सुनि लिय'
अचछा कहू!
एना ब्यग्र कियै छी?
कतेक जोर सं हाथ पकरने छी
दुखाइया!
कहलहुं जे मोन बड़ व्यग्र अछि
रोग त' कोनों नहिं
तखन कियै ?
कहै छी अहां के…
गीत संगीत मे मोन लगाउ
शांति भेटत !
हे ! पाठ नहिं पढ़ाउ
कानक कुंडल चमकबैत रहू
चूड़ी खनकबैत रहू
वैह हमर गीत
वैह संगीत
गांठक जोर
सक्कत कयने रहू
हे हमर प्रेम!
हृदय मे हरदम बसल रहू!
डॉ. प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,14-02-2020
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