की हम वैह पुष्प छी
रंग हमर अछि ओहिना शनगर
लाल गुलाबी बुल्लू पियर
उपर अम्बर ओहने विशाल
बुल्लू चद्दरि ओढ़ने निहाल
निचा धरती हरियर पसरल
तितलिक पांखि फर फर फर फर
भौंरा गावि रहल अछि गूं गूं
माइल पानि पटाबथि गर गर
मालिन हाथक फुलडाली गोल
माला के नहिं कोनो मोल
रमणिक गजरा गोल भेल अछि
पूजा पाठ तक बन्न भेल अछि
मंदिर क्यो नहिं लय जाइत अछि
की भेलै मनुक्ख के नहिं फुराइत अछि
प्रभु चरण मे अर्पित भय हम
चरम आनंद पावि लै छलहुं
नहिं पुजेगरी आ नहिं प्रेमी
नहिं श्रृंगार मे लागल प्रेयसी
क्यो नहिं वन मे आवि रहल अछि
मनुख बदलल बुझा रहल अछि।
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,26-03-2020
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