मैं तो चंदा मामा हूं
मैं तो चंदा मामा हूं, ठंढ़ा ठंढ़ा रहता हूं
सो जाय मुन्ना प्यारा और सो जाय मुन्नी प्यारी
घूम घूम नाच नाचकर, लोरी गाता फिरता हूं
मैं तो चंदा मामा हू ।
खिड़की के जाली से होकर मुन्नी को सहलाता हूं
रोशनदान से कूद कूदकर मुन्ने को लुभाता हूं
मम्मी भी सो जाती जब ,मैं तो गाता रहता हूं
मैं तो चंदा मामा हूं।
सूरज जब सोने जाता है मैं ड्युटी लग जाता हूँ
रात को सब सो जाते हैं मैं तो जगा ही रहता हूं
दादी मां खर्राटे भरती दादाजी उगताते हैं
मैं तो चंदा मामा हूं।
बच्चे जब सो जाते हैं मैं बालों को सहलाता हूं
स्वप्न देख मुस्काते बच्चे मैं मुग्ध मगन हो जाता हूं।
बीच रात में उल्लू बोले, चुप करा कर आता हूं
मैं तो चंदा मामा हूं ।
बच्चों के संग खेल खेल कर फुट वाल बन जाता हूं
उधर से सागर मुझे बुलाता मैं मिलने चल देता हूं।
सिंधु-चन्द्र का मेल अनोखा समझा नहीं मैं पाता हूं
मैं तो चंदा मामा हूं।
प्रमोद कुमार उर्फ नेहरू लाल दास
पांडिचेरी 22-04-2019
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