गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल
(गीत, एक मात्र की छूट ली गयी है, गायन की दृष्टि से)
गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल, तुम संग सुर मिलाऊं रे
टूट चुके सब साज मेरे, गला भी बुझने आये रे ।
गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल !
अनिष्ट देखकर दृष्टि गंवायी,कान भी बन्द पड़े हैं रे
पाप की चादर इतनी मैली, साबुन से नहिं धुलता रे !
गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल !
तुम खग हो खग की है नगरी, प्रीत की रीत तुम्हारी रे
कू कू करके गाते जब तुम , खग मृग सबही नाचे रे !
गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल !
मैं बौरा जब तुम्हें हूं सुनता, दुख बिच सुख को पाता रे
गाते रहना तूं प्रिय मेरे , सुबह कभी तो होंगे रे !
गीत मैं कैसे गाऊं कोकिल !
डॉ प्रमोद कुमार
पांडिचेरी,19-03-2020
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